Bhartiya Shiksha Board: भारत इस साल आजादी का अमृत महोत्सव (aazadi ka amrit mahotsav) मना रहा हैं क्योकि भारत को आजाद हुए 75 वर्ष पूरे हो गये हैं, इसी बीच केंद्र सरकार ने आजादी के 75 साल पूरे होने पर भारतीय शिक्षा बोर्ड (Bhartiya Shiksha Board) का गठन किया हैं। इस बोर्ड की जिम्मेदारीबाबा रामदेव के पतंजलि योगपीठ ट्रस्ट (Patanjali Yog Trust Haridwar) को सौप दी गयी हैं।

बाबा रामदेव ने जताया आभार-

मोदी सरकार (Modi Government) देश के 75वें वर्षगांठ को बड़ी धूमधाम से मना रहा हैं, इसके लिए कई सारे अभियान चलाए जा रहे हैं तथा योजनाओ का गठन हो रहा हैं। इसी बीच मोदी सरकार ने भारतीय शिक्षा बोर्ड का गठन किया हैं। इस बोर्ड के तहत बच्चो को पारंपरिक तरीके से शिक्षा प्रदान कि जाएगी। जिसकी जिम्मेदारी बाबा रामदेव (Baba Ramdev) के पंतजलि योगपीठ ट्रस्ट को सौपे जाने पर बाबा रामदेव ने आभार व्यक्त किया हैं।

बाबा रामदेव (Baba Ramdev) ने आगे कहा कि 1835 में मैकाले ने जो पाप किया था। उसे धोने का समय आ गया हैं। अब भारतीय शिक्षा बोर्ड के तहत भारत के बच्चों का मानस भारतीयता के अनुसार तैयार किया। इसके लिए उन्होने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (PM Narendra Modi) व गृहमंत्री अमित शाह (Home Minister Amit Shah) को धन्यवाद दिया हैं।

पहले बाबा रामदेव ने ही इस बोर्ड का विचार दिया था-

2015 में बाबा रामदेव ने अपने हरिद्वार स्थित वैदिक शिक्षा अनुसंधान संस्थान (VRI) के जरिए शिक्षा का 'स्वदेशीकरण' करने के लिए सीबीएसई (CBSE) की तर्ज पर एक राष्ट्रीय स्कूल बोर्ड स्थापित विचार प्रस्तुत किया था। लेकिन 2016 में केन्द्र सरकार द्वारा इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया गया था। इस प्रस्ताव के जरिए स्कूली शिक्षा बोर्ड में 'महर्षि दयानंद की पुरातन शिक्षा' और आधुनिक शिक्षा का मिश्रण करके भारतीय शिक्षा बोर्ड की स्थापना करना था।

2019 में मिली मंजूरी-

वर्ष 2019 के आम चुनाव शुरू होने के पहले भारतीय शिक्षा बोर्ड के गठन की प्रक्रिया को पूरा कर लिया गया था। जिससे वर्ष 2019 के लोकसभा चुनावों के लिए आदर्श आचार संहिता लागू होने से कुछ घंटे पहले मंजूरी मिली थी।

महर्षि संदीपनी राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान ने इस प्रक्रिया पर आपत्ति जताई-

शिक्षा मंत्रालय के तहत आने वाले स्वायत्त संगठन उज्जैन स्थित महर्षि संदीपनी राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान (MSRVPP) ने इस प्रक्रिया पर आपत्ति व्यक्त की थी। क्योकि MSRVPP अपना खुद भारतीय शिक्षा बोर्ड शुरू करना चाहता था। लेकिन केन्द्र ने एमएसआरवीपीपी की आपत्ति खारिज कर दी।

भारतीय शिक्षा बोर्ड देश का पहला राष्ट्रीय बोर्ड होगा-

Bhartiya Shiksha Board देश का पहला राष्ट्रीय स्कूल बोर्ड बनेगा। इस बोर्ड को सिलेबस तैयार करने, स्कूलों को संबद्ध करने, परीक्षा आयोजित करने और प्रमाण पत्र जारी करके भारतीय पारंपरिक ज्ञान का मानकीकरण करने का अधिकार प्राप्त होगा। यह आधुनिक शिक्षा के साथ इसे मिश्रित करके भारतीय परंपरा के अनुसार पढ़ाई करवाएगा।